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लंकापति रावण के गुण और अवगुण

 Know about Ravana  रावण का नाम सुनते ही हमहें अवगुणों की खान का अंदाजा होता है आपको जान कर अचरज होगा कि रावण में अवगुणों से कहीं अधिक गुण थे। रामायण का महा खलनायक लंकापति रावण के गुणों और अवगुणों का आज हम यह देखेंगे |

रामायण से रावण के गुण :

  • रावण वेद तथा समस्त पुराणों का ज्ञाता महापण्डित था।
  • अपने काल में रावण अदम्य शक्तिशाली वीर था |
  • इस धरा पर एक मात्र स्वर्ण लंका महल उसी का था अत: हम कह सकते है माँ लक्ष्मी की उसपर कृपा थी |
  • बरह्मा और महेश का वो अनन्य भक्त था और उनकी कठोर तपस्या करके उसने महा शक्तिया प्रदान की थी | कहते है अपने तप पर उसने १० बार अपने शीश काट कर अर्पण भी किये और दशानन कहलाया |
  • रावण सदाचारी था , माँ सीता का हरण करके भी उसने अपनी कभी सीमा लांघी नहीं | उसने नारी और सतीत्व की मर्यादा का पालन किया |
  • रावण असुर होते हुए भी महापंडित था क्योकि उसके पिता महापंडित थे |
  • रावण महाज्ञानी था उसने शिव को प्रसन्न करने के लिए क्षण भर में शिव तांडव स्त्रोत को रच दिया था |
  • रावण चारो वेदों का भी ज्ञाता था |
  • रावण के पास उड़न खटोला भी था जिसे पुष्पक विमान भी कहा जाता है | तो उसके वैज्ञानिक होने को बताता है |
  • रावण सम्मोहन विद्या को जानता था , इसी के साथ वो मायावी भी था जो कोई भी वेश बदल सकता था | सीता हरण उसने इसी तरह किया |

  • अब जाने रावण में क्या क्या अवगुण थे :

    लंकापति रावण के अवगुण :

  • रावण और उसकी असुरी सेना ने बहूत सारे संतो के यज्ञ भंग किये और कई धर्म व्यवस्थाओं को तोडा |
  • रावण को अहंकारी भी बताया गया है |
  • साधू का वेश बनाकर सीता हरण करना भी उसका एक लज्जित कार्य है |
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    यहाँ होती है रावण की पूजा
    रावण का मंदिर दशानन

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