|| मोर्वी नंदन श्याम की जय ||

खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर सूरजगढ़ का निशान

बाबा श्याम के खाटू में फाल्गुन मेले में वैसे तो लाखो भक्त लाखो निशान चढाते है पर एक निशान ऐसा होता है जो सबसे खास है , हो भी क्यों ना , खुद बाबा श्याम की मर्जी पर यह निशान हर साल उनके शिखर पर साल भर लहराता है |

सूरजगढ़ का निशान महिमा

सूरजगढ़ के निशान ( ध्वजा ) की महिमा है भारी :

आज से 350 साल पहले फाल्गुन शुक्ल द्वादशी पर बाबा श्याम के खाटू में नर नारी निशान चढाने आये | श्याम भक्तो में होड़ मच गयी की सबसे पहले निशान उनका चढ़ेगा | सबने फिर आपसी सहमती से यह निर्णय लिया की बंद मंदिर का जो ताला मोरछड़ी से खोलेगा उसी का निशान खाटू श्याम जी मंदिर के शिखर पर चढ़ेगा | सभी ने कोशिस की पर वे कामयाब नही हुए | जब सूरजगढ़ के श्याम भक्त मंगलाराम जी ने मोरछड़ी से ताले को छुआ तब मंदिर का ताला खुल गया | सबने सूरजगढ़ के निशान की जयकार की | बाबा श्याम के तब से परंपरा बन गयी की हर फाल्गुन द्वादसी पर पहला निशान सूरजगढ़ का दोपहर १ बजे चढ़ता है | मंगलाराम जी के बाद सांवरमल जी फिर उनके पुत्र बनवारी जी फिर उनके पुत्र मनोहर जी और इस तरह 368 सालो से हर साल बाबा श्याम के शिखर पर सूरजगढ़ का निशान शोभायमान होता है |


सूरजगढ़ निशान यात्रा देखे

368 सालो से चल रही है यह परंपरा :

सूरजगढ़ निशान गाजे बाजे के साथ पदयात्रा द्वारा पिछले 368 सालो से हर साल चढ़ाया जा रहा है | यह निशान अपने आप में वन्दनीय है |

ज्यूँ ज्यूँ चाले पूर्वा बसंती
तयु तयु यो लहरावै
सूरजगढ़ निशान में
माहरो श्याम धनी मुस्कावे


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shri khatu shyam ji