|| मोर्वी नंदन श्याम की जय ||

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श्री मोर्विनंदन श्री खाटूश्याम

जैसा की हम सभी जानते है, श्री बर्बरीक जी की माता कामकटंकटा, मूर दैत्य की पुत्री थी... पिता का नाम मूर होने से उनको खाटू श्याम मोर्विनंदन "मोरवी" अर्थात "मूर की पुत्री" कहा जाता है... एवं स्कन्दपुराण मे जगह जगह पर श्री श्री बर्बरीक जी की माता कामकटंकटा को मोरवी नाम से भी संबोधित किया गया है... स्वयं भगवन श्री कृष्ण ने श्री बर्बरीक को "मोर्व्ये " अर्थात "मोरवी के पुत्र" कह कर इस प्रकार संबोधित किया है...
श्री कृष्ण उवाच-

क्यों पुकारा जाता है खाटू श्याम जी को मोर्विनंदन श्याम 

वत्स ! मोर्व्ये ! ब्रूहि त्वं, सर्वं प्रच्छ, यदिच्छ्सी !
यथा घटोत्क्चो मह्यं सु प्रियश्च यथा भवान !! { स्कन्दपुराण, कौ. ख. ६१.१४}

भावार्थ: "तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक से कहा- पुत्र मोर्व्ये ! बोलो जो बात पूछना चाहते हो, सब पूछो... मुझे जिस प्रकार घटोत्कच प्यारा है उस भाँति तुम भी प्यारे हो !!"

इस प्रकार से स्कन्दपुराण में बार बार श्री श्यामदेव की माता का नाम "मोरवी" उलेखित हुआ है... इसीलिए उनकी माताश्री के सम्मान में ही श्री श्याम देव को "मोरवीनंदन" भी कहा जाता है...

!! जय जय मोरवीनंदन,जय श्री श्याम !!
!! जय जय मोरवीनंदन,जय श्री श्याम !!
!! जय जय मोरवीनंदन,जय श्री श्याम !!

 श्री खाटू श्याम जी मंदिर शिलालेख

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shri khatu shyam ji