|| मोर्वी नंदन श्याम की जय ||

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श्री श्याम बाबा पूजन विधि

यह एक अन्धविश्वास है की श्री खाटू श्याम जी का शीश या उनकी फोटो घर पर या ऑफिस में नही रखनी चाहिए .
आप अन्य देवी देवताओ की तरह श्री श्याम बाबा की फोटो या शीश को अपने साथ कही भी रख सकते है . और ऐसा करने से श्याम बाबा नाराज नही बल्कि प्रसन्न ही होते है | यह ध्यान जरुर रखे की इनके मान सम्मान में कोई कमी नही हो , या किसी भी तरह पूजा में गलती नही हो |


अब जानिए की श्याम बाबा पूजन विधि किस तरह है
मैं आपसे यही कहूँगा की सच्चे तन मन धन से जो जेसे पूजा करे वही भगवन स्वीकरत कर लेते है . किसी भी देवी देवता की कोई विशेष विधि नही है पूजन की . वो तो सिर्फ प्रेम के भूखे है आप अपने आप को पूर्ण समर्प्रित करके जिस विधि से उनकी पूजा आराधना करेंगे वो उसे स्वीकरत कर लेंगे .

फिर भी कुछ स्टेप्स इस प्रकार है
1) पूजन करने के लिए आपके पास श्री खाटू श्याम जी फोटो या फिर शीश मूरत होनी चाहिए यदि आपके पास नही है तो आप इसे किसी मूर्ति की दुकान से ले आये
2) अब आप गंधा (खुशबु ) , दीपा (दीपक ), धूपा (धुप), नेविदयम (भोग) , पुष्पअर्चना (पुष्प माला) को अपने पास रखे .
3) श्याम बाबा की फोटो या शीश मूरत को पंचामृत या फिर दूध दही और फिर स्व्च्छ जल से स्नान कराके फिर रेशम के मुलायम कपडे से साफ़ करे और पुष्पमाला से श्रृंगार करे
4) अब पूजन शुरू करने से पूर्व श्याम बाबा की ज्योत ले एक घी का दीपक जलाये और अगरबती या धुपबती जलाये
5) श्री श्याम बाबा को दूध बहूत प्यारा है अत उन्हें कच्चा दूध पान करवाए
6) श्री श्याम बाबा के अब भोग लगाये भोग में आप चूरमा दाल बाटी या मावे के पेद्दे काम में ले सकते है
7) अब श्याम बाबा की आरती करे और आशीष पाए.
8) श्री श्याम बाबा के यह ११ जयकारे लगाये : जय श्री श्याम ,जय खाटू वाले श्याम , जय हो शीश के दानी , जय हो कलियुग देव की , जय खाटू नरेश , जय हो खाटू वाले नाथ की , जय मोर्वये , जय मोर्विनंदन श्याम , लीले के अश्वार की जय , लखदातार की जय , हारे के सहारे की जय .
9) अब गौ माँ के भोजन का भाग निकाल कर और गौ माँ को खिलाने के बाद यह आप भोजन कर सकते है .

श्याम कीर्तन से जुड़े कुछ  नियम

1) कीर्तन में शामिल होने से पूर्व अपने मन और तन को स्व्च्छ रखे अर्थात तन और मन सिर्फ श्याम में समर्प्रित हो  

2) बाबा श्याम के जयकारे में कंजूसी न आने दे | 

3) भजन कीर्तन के दोहराण अनावशक बाते न करे | 

4) नशीले पर्दाथो का सेवन न करे | 

5) भजनों के समय श्याम भजन गायकों को प्रोत्साहित करते रहे |

6) सत्संग में सोये नहीं और न ही बार बार सत्संग से उठकर  सत्संग में शामिल लोगो को तकलीफ पहुचाये |

7) हो सके तो सत्संग के अंतिम चरण तक रुके और प्रसादी लेकर ही सत्संग से जाये |

 

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