|| मोर्वी नंदन श्याम की जय ||

06 January 2021 Darshan 01 January 2021 Darshan साल के अंतिम दिनों में कब कब खुलेगा श्याम मंदिर 25 December Ekadashi 2020 Darshan Day By Day Darshan

खाटू श्याम जी में अन्य दर्शनीय जगह

श्याम कुंड : shyam kund khatushyamji श्री खाटू श्याम जी का शीश जिस धरा के भाग से अवतरित हुआ था वो श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है . माना जाता है की इस कुंड में श्याम भक्त सच्चे मन से एक डुबकी लगा ले तो वो अपनी बुराइयों से दूर और अच्छे शरीर का धनि हो जाता है . श्याम कुंड 2 भागो में बिभक्त है .
एक महिला श्याम कुंड और एक पुरुष श्याम कुंड .


श्याम बगीची :shyam bagichi श्री खाटू श्याम जी के निज मंदिर के बाई तरफ श्याम बगीची है . श्री श्याम भक्त आलू सिंह जी इसी बगीची के फूलो से श्याम बाबा का नित श्रींगार किया करते थे .
इसी बगीची में श्री आलू सिंह जी की मूरत लगी हुई है जिस पर सभी श्याम भक्त अपना शीश झुकाने और दर्शन करने आते है .


गोरीशंकर मंदिर :
भगवान शिव का मंदिर भी खाटू श्याम जी मंदिर के करीब है . यह मंदिर भी बड़ा चमत्कारी है . कहा जाता है की जब मुग़ल बादशाह ओरंजेब की सेना ने मुस्लिम कट्टरवादिता की वजह से इस मंदिर के शिव लिंग को तोड़ना चाहा तब शिव लिंग में से खून का फवारा निकला . यह देख कर ओरंजेब की सेना डर के मारे भाग खड़ी हुई .


सीकर जिले के अन्य प्रसिद्द मंदिर :


जीन माता मंदिर :
माँ जीन बहूत सारे लोगो की कूल देवी है . जीन माता अस्त्भुजा वाली माँ है .यह चमत्कारी माँ अपने भक्तो के दुखड़े हरती है . कहते है की माता का मन्दिर कम से कम 1000 साल पुराना है। माता जीण को शक्ति का अवतार माना गया है.
jeen mata mandir  दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने एक बार हर्ष पर्वत पर आक्रमण किया और पुरे मंदिरों , गुफाओं, और अनेक भवनों को क्षत विक्षत कर दिया। फ़िर वो जीन माता के मदिर की और बढ़ा तब माता ने भंवरा मधुमखियों का रूप धर कर उसकी पूरी सेना पर आक्रमण कर दिया । मधुमखियों के दंशो से बेहाल पूरी सेना घोडे मैदान छोड़कर भाग गए।
तब औरंगजेब ने हार मानकर माता के चरणों में शीश नवाया व क्षमा याचना की। माँ ने उसे तब माफ़ किया । माता की शक्ति को जानकर उसने वहां पे भंवरो की रानी के नाम से शुद्ध खालिस सोने की बनी मूर्ति भेंट की और “अखंड ज्योत जलाई” और आज सालो के बाद भी वो अखंड ज्योत जल रही है। नवरात्रों में लगने वाले वार्षिक मेले में इस तीर्थस्थल पर बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। यह हिंदू त्योहार भारतीय कैलेंडर के चैत्र और अश्विन महीने में मनाया जाता है।
 

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shri khatu shyam ji